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JAN KALYAN ASHRAM

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JAN KALYAN ASHRAM

Address -
village -sidhpur , semriharchand ,tehsil - babai ,.distt – Hoshangabad [ M.P.] - 461668
Ph. : 8708370168 , 8770929264

E-mail : info@jankalyanashram.org



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जन कल्याण आश्रम उद्देश्य -


1. वन क्षेत्रो के आदिवाशी निर्धन छात्रों कि शिक्षा व्यवस्था आवासीय विद्यालय एवं बाल –नबाड़ी का सञ्चालन .
2. आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मार्थ ओषधाल्या चलाना .
3. गो वंश की रक्षा हेतु गो शाला चलाना एवं वन प्राणियों कि रक्षा करना
4. असहाय वृद्धो व महिलाओं कि व्यवस्था हेतु वानप्रस्थ आश्रम कि व्यवस्था करना
5. प्राकृतिक आपदाओं में वन वाशियों कि शासकीय एवं सामाजिक स्तर से हर संभव सहयोग करना .


गुरुकुल आश्रम द्वारा संचालित गतिविधियाँ –

1. वर्तमान में आश्रम द्वारा कक्षा 1 से 8 वीं तक पुर्णतः निशुल्क विद्यालय चलाया जा रहा है जिसमे 200 के लगभग छात्र – छात्राएं अध्यनरत है

2. आश्रम में 100 छात्रों हेतु आदिवासिये छात्रावास कि व्यवस्था है शिक्षा सन २०१६ -२०१७ में 109 छात्र रहते थे छात्रों को तीनो समय भोजन वस्त्र प्राथमिक ओषधियाँ आवासीय बिस्तर व्यवस्था पुर्णतः निशुल्क है

3. छात्रावाश कि दिनचर्या छात्रों को वैदिक संस्कृति से संस्कारित करना प्रथम उद्देश्य प्रात: 4:30 परे जागरण से योग आशन व्यायाम इश्वर प्रार्थना उपशना से लेकर विद्यालय पश्चात रात के 9 बजे तक छात्रों कसा समय पूर्णतः वैदिक परंपरा के अनुशार है

4. गो शाला का संचालन – अश्त्रम में एक गो शाला संचालित है जो पूर्णतः आभाव ग्रस्त है शासन अथवा कोई भी निश्चित आय अथवा दान का स्त्रोत न होने से गो शाला कि बिल्डिंग अथवा अन्य संसाधन से निर्धन है गो शाला वन्य क्षेत्र में होने से शहरी क्षेत्र के लोग अनुपयोगी एवं वृद्ध , गंभीर चोट होने से गो धन को जंगल में आश्रम के पास छोड़ जाते है जिससे आश्रम को गो सेवा कि अतिरिक्त चिंता करनी पड़ती है

Message-

आचार्य राजेंद्र शास्त्री
जनकल्याण आश्रम समिति सिद्ध पुर ढोभ के संस्थापक
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आचार्य राजेंद्र प्रसाद जी मूल रूप से कश्मीरी पंडित जम्मू के रहने वाले थे आर्य वन वानप्रस्थ साधक रोजड़ गुजरात दर्शन योग महा विद्यालय गुजरात से दर्शनाचार्य हो कर म.प्र. आर्ष गुरुकुल होशंगाबाद में आचार्य पंडित नन्द किशोर जी के प्रयाश से आदिवासी क्षेत्र में 10 एकड़ भूमि क्रय कर आश्रम कि Read more

Shri
Principal
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"The first Principal of true teaching is that nothing can be taught. The teacher is not an instructor or a task master, he is a helper and a guide. His business is to suggest and not to impose. The second Principal is that the mind has to be consulted in its own growth.." Read more